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By: Newspoint360 | Publish Date:Oct 8 2016 7:05AM

'तलाक-तलाक-तलाक' महिलाओं की गरिमा के खिलाफ : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने किया तीन तलाक और बहुविवाह का विरोध

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'तलाक-तलाक-तलाक' महिलाओं की गरिमा के खिलाफ : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने किया तीन तलाक और बहुविवाह का विरोध

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने पहली बार मुस्लिमों में सदियों से जारी ट्रिपल तलाक का विरोध किया है. ट्रिपल तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर विरोध जताया. केंद्र सरकार का तलाक की इस परंपरा के बारे में कहना है कि ये महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है. अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि तलाक-तलाक-तलाक महिलाओं के साथ लैंगिग भेदभाव पैदा करता है. साथ ही सरकार का कहना है कि लैगिंक समानता और महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता है.

ट्रिपल तलाक पर गहन विचार की जरुरत

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में शायरा बानो को द्वारा ट्रिपल तलाक की परंपरा के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से इस मसले पर उनका जवाब मांगा था. इसी मामले में सुनवाई के दौरान कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अपने हलफनामे में लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, धार्मिक व्यवहारों और विभिन्न इस्लामी देशों में वैवाहिक कानून का जिक्र किया. सरकार का कहना है कि तलाक-तलाक-तलाक को धर्म के जरुरी हिस्से के तौर पर नहीं लिया जा सकता है. संविधान देश के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार प्रदान करता है. इसलिए ट्रिपल तलाक पर गहन विचार की जरुरत है.

केंद्र सरकार ने किया मुस्लिमों में जारी तीन तलाक, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह प्रथा का विरोध

भारत सरकार इतिहास में पहली बार किसी केंद्र सरकार ने मुस्लिमों में जारी तीन तलाक, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह प्रथा का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया है. साथ ही इस मुद्दे पर लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता जैसे तथ्यों के आधार पर पुनर्विचार करने का समर्थन किया है. कानून एवं न्याय मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकुलिता विजयवर्गीय ने कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल किया. जिसमें उन्होंने दलील दी कि तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की प्रथा पर पुर्नविचार की जरूरत है.